रूपया मनुष्य पैदा करता है? मनुष्य कीर्ति और नाम पैदा करता है या कीर्ति और नाम मनुष्य पैदा करता है?’’
176 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
(दशम खंड, पृष्ठ 62)
अठारहवीं सदी में विज्ञान का दबाव बढ़ जाने से जब धर्म कोे अपना अस्तित्व बनाए रखना कठिन हो गया, तब हेगल ने आदर्शवाद में द्वन्द्ववाद का सिद्वान्त जोड़कर उसे तेज़ी से बदल रहे समाज की नई परिस्थिति के अनुरूप बनाया। हेग का मत था कि समाज विचार का प्रतिबिम्ब है। ज्यों-ज्यों विचार का विकास हो रहा है,
रूपया मनुष्य पैदा करता है? मनुष्य कीर्ति और नाम पैदा करता है या कीर्ति और नाम मनुष्य पैदा करता है?’’
176 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
(दशम खंड, पृष्ठ 62)
अठारहवीं सदी में विज्ञान का दबाव बढ़ जाने से जब धर्म कोे अपना अस्तित्व बनाए रखना कठिन हो गया, तब हेगल ने आदर्शवाद में द्वन्द्ववाद का सिद्वान्त जोड़कर उसे तेज़ी से बदल रहे समाज की नई परिस्थिति के अनुरूप बनाया। हेग का मत था कि समाज विचार का प्रतिबिम्ब है। ज्यों-ज्यों विचार का विकास हो रहा है,