यह भी द्वन्द्वात्मक आदर्शवाद है और पैरों के बल खड़ा होने के बजाए सिर के बल खड़ा है। जिस तरह माक्र्स ने हेगल के सिद्वान्त को पैरों क बल खड़ा किया था और दर्शन को विज्ञान बना दिया था, उसी तरह हमारे देश में भी विवेकानन्द के द्वन्द्वात्मक आदर्शवाद को पैरों के बल खड़े करके द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद में बदलने की ज़ररूत थी, जिस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। परिणाम हमारे सामने है।
वैसे हम देख चुके हैं कि विवेकानन्द सैद्वान्तिक तथा व्यावहारिक
यह भी द्वन्द्वात्मक आदर्शवाद है और पैरों के बल खड़ा होने के बजाए सिर के बल खड़ा है। जिस तरह माक्र्स ने हेगल के सिद्वान्त को पैरों क बल खड़ा किया था और दर्शन को विज्ञान बना दिया था, उसी तरह हमारे देश में भी विवेकानन्द के द्वन्द्वात्मक आदर्शवाद को पैरों के बल खड़े करके द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद में बदलने की ज़ररूत थी, जिस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। परिणाम हमारे सामने है।
वैसे हम देख चुके हैं कि विवेकानन्द सैद्वान्तिक तथा व्यावहारिक