योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

रूप से हेगल और फ्यूर्बाख से आगे जाते है। कारण यह कि हेगल और फ्यूर्बाख ने अपने को राजनीति से अलग रखा, जबकि विवेकानन्द ने धर्म के माध्यम से राजनीतिक लड़ाई लड़ी। दूसरे, उन्नीसवीं सदी के अन्त तक माक्र्सवाद युग की प्रबल विचारधारा बन चुका था। चाहे विवेकानन्द ने माक्र्स और एंगेल्स के नामों का उल्लेख नहीं किया, पर यह सम्भव नहीं था कि उन सरीखे चिंतक ने इस विचारधारा के बारे में कुछ पढ़ा और समझा-सोचा न हो। उन्होंने समाज का ऐतिहासिक


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रूप से हेगल और फ्यूर्बाख से आगे जाते है। कारण यह कि हेगल और फ्यूर्बाख ने अपने को राजनीति से अलग रखा, जबकि विवेकानन्द ने धर्म के माध्यम से राजनीतिक लड़ाई लड़ी। दूसरे, उन्नीसवीं सदी के अन्त तक माक्र्सवाद युग की प्रबल विचारधारा बन चुका था। चाहे विवेकानन्द ने माक्र्स और एंगेल्स के नामों का उल्लेख नहीं किया, पर यह सम्भव नहीं था कि उन सरीखे चिंतक ने इस विचारधारा के बारे में कुछ पढ़ा और समझा-सोचा न हो। उन्होंने समाज का ऐतिहासिक


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