योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

भौतिकवादी विवेचन किया है और उनकी दृष्टि न सिर्फ छोटे-से-छोटे सूक्ष्म परिवर्तन पर रहती थी, बल्कि उन्होंने भविष्यवाणी भी की है। श्रमबल की व्यवस्था की भविष्यवाणी भी इन शब्दों में की है:

‘‘तो भी ऐसा समय आएगा, जब शूद्रत्व सहित शूद्रों का प्राधान्य होगा, अर्थात् आजकल जिस प्रकार शूद्र जाति वैशयत्व अथ्वा क्षत्रियत्व लाभ कर अपना बल दिखा रही है, उस प्रकार नहीं, बल्कि अपने शूद्रोचित धर्म-कर्म सहित वह समाज में आधिपत्य प्राप्त करेगी।


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भौतिकवादी विवेचन किया है और उनकी दृष्टि न सिर्फ छोटे-से-छोटे सूक्ष्म परिवर्तन पर रहती थी, बल्कि उन्होंने भविष्यवाणी भी की है। श्रमबल की व्यवस्था की भविष्यवाणी भी इन शब्दों में की है:

‘‘तो भी ऐसा समय आएगा, जब शूद्रत्व सहित शूद्रों का प्राधान्य होगा, अर्थात् आजकल जिस प्रकार शूद्र जाति वैशयत्व अथ्वा क्षत्रियत्व लाभ कर अपना बल दिखा रही है, उस प्रकार नहीं, बल्कि अपने शूद्रोचित धर्म-कर्म सहित वह समाज में आधिपत्य प्राप्त करेगी।


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