पाश्चात्य जगत् में इसकी लालिमा भी आकाश में दिखने लगी है, और इसका फलाफल विचार कर सब लोग घबराए हुए हैं। सोशलिज्म, अनार्किज़्म, नाइहिलिज़्म आदि सम्प्रदाय इस विप्लव की आगे चलने वाली ध्वजाएं हैं। युगों से पिासकर शूद्र मात्र या तो कुत्तों की तरह बड़ों के चरण चाटने वाले या हिंó पशुओं की तरह निर्दय हो गए हैं। फिर सदा से उनकी अभिलाषाएं निष्फल होती आ रही हैं। इसलिए दृढ़ता और अध्यवसाय उनमें बिलकुल नहीं।’’
श्रमिकों में दृढ़ता और अध्यवसाय
पाश्चात्य जगत् में इसकी लालिमा भी आकाश में दिखने लगी है, और इसका फलाफल विचार कर सब लोग घबराए हुए हैं। सोशलिज्म, अनार्किज़्म, नाइहिलिज़्म आदि सम्प्रदाय इस विप्लव की आगे चलने वाली ध्वजाएं हैं। युगों से पिासकर शूद्र मात्र या तो कुत्तों की तरह बड़ों के चरण चाटने वाले या हिंó पशुओं की तरह निर्दय हो गए हैं। फिर सदा से उनकी अभिलाषाएं निष्फल होती आ रही हैं। इसलिए दृढ़ता और अध्यवसाय उनमें बिलकुल नहीं।’’
श्रमिकों में दृढ़ता और अध्यवसाय