योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद की विचारधारा से जुड़कर, उसे आत्मसात् कर लेने के बाद ही आता है।


नव-जागरण

‘‘हमारी आंखें आगे हैं, पीछे नहीं।’’

-विवेकानन्द

स्वदेश लौटने के बाद विवेकानन्द ने अपने कलकत्ता के भाषण में कहा था:

‘‘इसके साथ एक और बात तुम्हें समझनी होगी, वह यह कि आज ऐसी ही वस्तु हमारे सामने मौजुद है। इस तरह की आध्यात्मिकता की एक बाढ़ के प्रबल वेग से आने के पहले समाज में कुछ-कुछ छोटी-छोटी तरंगें उठती दीख पड़ती हैं। इन्हीं में से एक अज्ञात,


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द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद की विचारधारा से जुड़कर, उसे आत्मसात् कर लेने के बाद ही आता है।


नव-जागरण

‘‘हमारी आंखें आगे हैं, पीछे नहीं।’’

-विवेकानन्द

स्वदेश लौटने के बाद विवेकानन्द ने अपने कलकत्ता के भाषण में कहा था:

‘‘इसके साथ एक और बात तुम्हें समझनी होगी, वह यह कि आज ऐसी ही वस्तु हमारे सामने मौजुद है। इस तरह की आध्यात्मिकता की एक बाढ़ के प्रबल वेग से आने के पहले समाज में कुछ-कुछ छोटी-छोटी तरंगें उठती दीख पड़ती हैं। इन्हीं में से एक अज्ञात,


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