क्या तुम नहीं देखते हो, वह दरिद्र ब्राह्यण बालक जो एक दूर गांव में-जिसके बारे में तुममें से बहुत कम ही लोगों ने सुना होगा-जन्मा था, इस समय सम्पूर्ण संसार में पूजा जा रहा है, और उसे वे पूजते हैं, जो शताब्दियों से मूर्ति-पूजा के विरोध में आवाज़ उठाते आए हैं। यह किसकी शक्ति है? यह तुम्हारी शक्ति है या मेरी? नहीं, यह किसी और की शक्ति नहीं। जो शक्ति यहां श्रीरामकृष्ण परमहंस के रूप में आविर्भूत हुई थी, यह वही शक्ति है, और मैं,
क्या तुम नहीं देखते हो, वह दरिद्र ब्राह्यण बालक जो एक दूर गांव में-जिसके बारे में तुममें से बहुत कम ही लोगों ने सुना होगा-जन्मा था, इस समय सम्पूर्ण संसार में पूजा जा रहा है, और उसे वे पूजते हैं, जो शताब्दियों से मूर्ति-पूजा के विरोध में आवाज़ उठाते आए हैं। यह किसकी शक्ति है? यह तुम्हारी शक्ति है या मेरी? नहीं, यह किसी और की शक्ति नहीं। जो शक्ति यहां श्रीरामकृष्ण परमहंस के रूप में आविर्भूत हुई थी, यह वही शक्ति है, और मैं,