तुम, साधु, महापुरूष, यहां तक कि अवतार और सम्पूर्ण ब्रह्यण्ड भी उसी न्यूनाधिक रूप में पंुजीभूत शक्ति की लाली मात्र है। इस समय लोग अंत होने के पहले ही तुम लोग इसकी अधिकाधिक आश्चर्यमयी लीलाएं देख पाओगे। भारत के पुनरूत्थान के लिए इस शक्ति का आविर्भाव ठीक ही समय पर हुआ। जो मूल जीवनी शक्ति भारत को सदा स्फूर्ति प्रदान करेगी, उसकी बात कभी-कभी हम भूल जाते हैं।’’ (पंचम खंड, पृष्ठ 207)
मैक्सिम गोर्की ने उन्नीसवीं शताब्दी को ‘प्रकाश
तुम, साधु, महापुरूष, यहां तक कि अवतार और सम्पूर्ण ब्रह्यण्ड भी उसी न्यूनाधिक रूप में पंुजीभूत शक्ति की लाली मात्र है। इस समय लोग अंत होने के पहले ही तुम लोग इसकी अधिकाधिक आश्चर्यमयी लीलाएं देख पाओगे। भारत के पुनरूत्थान के लिए इस शक्ति का आविर्भाव ठीक ही समय पर हुआ। जो मूल जीवनी शक्ति भारत को सदा स्फूर्ति प्रदान करेगी, उसकी बात कभी-कभी हम भूल जाते हैं।’’ (पंचम खंड, पृष्ठ 207)
मैक्सिम गोर्की ने उन्नीसवीं शताब्दी को ‘प्रकाश