योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

की शताब्दी’ कहा है। पूंजीवादी क्रांन्ति ने जो अठारहवीं शताब्दी के अन्त तक सम्पन्न हुई, न सिर्फ

179 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द

सामन्तवाद और उसके आर्थिक आधार को बल्कि उसकी धार्मिक मान्यताओं को भी ध्वस्त कर दिया था। मानव चेतना ने रूढ़िवाद और अंधविश्वास के बंधनों से मुक्त होकर लम्बे-लम्बे डग भरे थे, विज्ञानन के नये-नये आविष्कारों ने दृढ़ आत्मविश्वास और गौरव की भावनाओं को जन्म दिया था। सारांश यह है कि अठारहवीं शताब्दी में विज्ञान और बुद्विवाद का जो विकास हुआ,


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की शताब्दी’ कहा है। पूंजीवादी क्रांन्ति ने जो अठारहवीं शताब्दी के अन्त तक सम्पन्न हुई, न सिर्फ

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सामन्तवाद और उसके आर्थिक आधार को बल्कि उसकी धार्मिक मान्यताओं को भी ध्वस्त कर दिया था। मानव चेतना ने रूढ़िवाद और अंधविश्वास के बंधनों से मुक्त होकर लम्बे-लम्बे डग भरे थे, विज्ञानन के नये-नये आविष्कारों ने दृढ़ आत्मविश्वास और गौरव की भावनाओं को जन्म दिया था। सारांश यह है कि अठारहवीं शताब्दी में विज्ञान और बुद्विवाद का जो विकास हुआ,


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