से लेकर आधुनिक यूरोप के वैज्ञानिक बुद्विवाद तक सभी विचारों का अपने अन्दर समावेश किया था।’’ (रामकृष्ण, पृष्ठ 107)
1772 में राममोहन राय का जन्म एक धनी ब्राह्यण परिवार में हुआ था। ब्राह्यण होने के बावजूद उन्होंने पटना के मदरसे में अरबी और फारसी सीखी और चैदह वर्ष ही की अवस्था में कुरान के अलावा अरस्तु और यूक्लिड का अध्ययन किया। इसके बाद उन्होंने 14 ये 16 बरस की उम्र में बनारस जाकर संस्कृत सीखी और वेदान्त शास्त्रों का अध्ययन
से लेकर आधुनिक यूरोप के वैज्ञानिक बुद्विवाद तक सभी विचारों का अपने अन्दर समावेश किया था।’’ (रामकृष्ण, पृष्ठ 107)
1772 में राममोहन राय का जन्म एक धनी ब्राह्यण परिवार में हुआ था। ब्राह्यण होने के बावजूद उन्होंने पटना के मदरसे में अरबी और फारसी सीखी और चैदह वर्ष ही की अवस्था में कुरान के अलावा अरस्तु और यूक्लिड का अध्ययन किया। इसके बाद उन्होंने 14 ये 16 बरस की उम्र में बनारस जाकर संस्कृत सीखी और वेदान्त शास्त्रों का अध्ययन