योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

कभी-कभी बहुत अधिक परिश्रम करना पड़ता था। हमें स्मरण है, एक दिन उन्होंने इस विषय का प्रसंग उठने पर हमें बताया था, ‘‘मैट्रिक परीक्षा के आरम्भ होने के दो-तीन दिन पहले मैंने देखा कि रेखागणित कुछ भी नहीं पढ़ा गया है। तब सारी रात जागकर उसे पढ़ने लगा और 24 घंटे में उसकी चार पुस्तकें पढ़कर परीक्षा दे आया।’ ईश्वर-कृपा से उन्हें दृढ़ शरीर तथा अपूर्व मेघा प्राप्त थी, इसलिए वे ऐसा कर सके थे, इसमें कोई संदेह नहीं।’’ (तृतीय खंड, पृष्ठ 59-60)


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कभी-कभी बहुत अधिक परिश्रम करना पड़ता था। हमें स्मरण है, एक दिन उन्होंने इस विषय का प्रसंग उठने पर हमें बताया था, ‘‘मैट्रिक परीक्षा के आरम्भ होने के दो-तीन दिन पहले मैंने देखा कि रेखागणित कुछ भी नहीं पढ़ा गया है। तब सारी रात जागकर उसे पढ़ने लगा और 24 घंटे में उसकी चार पुस्तकें पढ़कर परीक्षा दे आया।’ ईश्वर-कृपा से उन्हें दृढ़ शरीर तथा अपूर्व मेघा प्राप्त थी, इसलिए वे ऐसा कर सके थे, इसमें कोई संदेह नहीं।’’ (तृतीय खंड, पृष्ठ 59-60)


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