अंग्रेज़ी राज्य स्थापित होते ही ईसाई मिशनरियों के दल के दल देश में आने लगे, आना अनिवार्य था। उन्होंने श्रीरामपुर में बहुत बड़ा प्रेस लगाया और बंगला भाषा में साहित्य छापकर हीदनों (भ्मंजीमदे) को ‘अंधकार से आलोक’ में लाने का काम बड़े उत्साह से शुरू किया। इन मिशनरियों का प्रचार यह था कि हिन्दू धर्म, हिन्दू समाज उनके आचार-व्यवहार और रीति-रिवाज सभी निन्दनीय हैं, क्रूरता और पैशाचिकता से भरे हुए हैं। इसी कारण वे इस लोक में सुख-समृद्वि
अंग्रेज़ी राज्य स्थापित होते ही ईसाई मिशनरियों के दल के दल देश में आने लगे, आना अनिवार्य था। उन्होंने श्रीरामपुर में बहुत बड़ा प्रेस लगाया और बंगला भाषा में साहित्य छापकर हीदनों (भ्मंजीमदे) को ‘अंधकार से आलोक’ में लाने का काम बड़े उत्साह से शुरू किया। इन मिशनरियों का प्रचार यह था कि हिन्दू धर्म, हिन्दू समाज उनके आचार-व्यवहार और रीति-रिवाज सभी निन्दनीय हैं, क्रूरता और पैशाचिकता से भरे हुए हैं। इसी कारण वे इस लोक में सुख-समृद्वि