चाहते हैं और मृत्यु के पश्चात् ईसाइयों के स्वर्ग-राज्य में जाने के इच्छुक हैं तो वे ईसा और मेरी की शरण आएं, ईसाई धर्म ग्रहण करें। उनके लिए मुक्ति का यही एक मार्ग है।
पहले बंगला सीखना और फिर उनके द्वारा प्रचार करना मिशनरियों के लिए कठिन कार्य था और बहुत उपयोगी भी नहीं था। प्रचार-कार्य में आने वाली विघ्न-बाधाओं को देखते हुए उन्हांेने यह योजना बनाई कि शिक्षा के प्रसार के लिए स्कूल खोले जाएं और स्कूलों के जरिए प्रचार का
चाहते हैं और मृत्यु के पश्चात् ईसाइयों के स्वर्ग-राज्य में जाने के इच्छुक हैं तो वे ईसा और मेरी की शरण आएं, ईसाई धर्म ग्रहण करें। उनके लिए मुक्ति का यही एक मार्ग है।
पहले बंगला सीखना और फिर उनके द्वारा प्रचार करना मिशनरियों के लिए कठिन कार्य था और बहुत उपयोगी भी नहीं था। प्रचार-कार्य में आने वाली विघ्न-बाधाओं को देखते हुए उन्हांेने यह योजना बनाई कि शिक्षा के प्रसार के लिए स्कूल खोले जाएं और स्कूलों के जरिए प्रचार का