काम अधिक सरलता से चल सकेगा। यह दूसरा तरीका पहले की अपेक्षा सचमुच सफल रहा। उस समय की परिस्थिति का विश्लेषण करते हुए विवेकानन्द लिखते हैं:
‘‘...जिन बच्चों ने इन नई शिक्षण-संस्थाओं में शिक्षा-दीक्षा पाई, वे पाश्चात्य पद्वति पर चल निकले और बचपन ही से उनके आदेशों में पग गए और इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं कि प्राचीन पद्वति के संबंध में उनके मन में तर्क-वितर्क होने लगा। कुसंस्कारों को एक ओर हटाने तथा सत्य का अनुसंधान करने
काम अधिक सरलता से चल सकेगा। यह दूसरा तरीका पहले की अपेक्षा सचमुच सफल रहा। उस समय की परिस्थिति का विश्लेषण करते हुए विवेकानन्द लिखते हैं:
‘‘...जिन बच्चों ने इन नई शिक्षण-संस्थाओं में शिक्षा-दीक्षा पाई, वे पाश्चात्य पद्वति पर चल निकले और बचपन ही से उनके आदेशों में पग गए और इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं कि प्राचीन पद्वति के संबंध में उनके मन में तर्क-वितर्क होने लगा। कुसंस्कारों को एक ओर हटाने तथा सत्य का अनुसंधान करने