अपनाया और मिशनरियों के कुत्सित प्रचार का डटकर मुकाबला किया। उन्होंने 1820 में बाइबिल के आधार पर ‘शान्ति व आनन्द के पथ-प्रदर्शक ईसा की शिक्षाएं’ (ज्ीम चतमबमचजे व िश्रमेनेए ळनपकम जव चमंबम ंदक भ्ंचचपदमेे) पुस्तक लिखी, जिसमें उन्होंने मिशनरियों से पूछा
181 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
कि अगर ईश्वर पडरूक (कबूतर) के रूप में जन्म ले सकता है तो गरूड़ के रूप में क्यों नहीं ले सकता, राममोहन राय ने मिशनरियों को बताया कि हिन्दू
अपनाया और मिशनरियों के कुत्सित प्रचार का डटकर मुकाबला किया। उन्होंने 1820 में बाइबिल के आधार पर ‘शान्ति व आनन्द के पथ-प्रदर्शक ईसा की शिक्षाएं’ (ज्ीम चतमबमचजे व िश्रमेनेए ळनपकम जव चमंबम ंदक भ्ंचचपदमेे) पुस्तक लिखी, जिसमें उन्होंने मिशनरियों से पूछा
181 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
कि अगर ईश्वर पडरूक (कबूतर) के रूप में जन्म ले सकता है तो गरूड़ के रूप में क्यों नहीं ले सकता, राममोहन राय ने मिशनरियों को बताया कि हिन्दू