धर्म की तुम जो व्याख्याएं करते हो वे सर्वदा मिथ्या तथा भ्रान्तिपूर्ण हैं। वेदों और उपनिषदों में मूर्ति-पूजा का कहीं उल्लेख नहीं। वेदान्त दर्शन के अनुसार सभी जीवों में एक ही आत्मा है।
1815 में कलकत्ता आकर राममोहन रय ने कुछ पे्रमी-सज्जनों के सहयोग से ‘आत्मीय सभा’ नाम की एक संस्था गठित की। इस संस्था द्वारा उन्होंने पुस्तकें और पैम्फ्लेट लिखकर एक तरफ हिन्दू धर्म के कुसंस्कारों तथा मूर्ति-पूजा के विरूद्व और दूसरी तरफ मिशनरियों
धर्म की तुम जो व्याख्याएं करते हो वे सर्वदा मिथ्या तथा भ्रान्तिपूर्ण हैं। वेदों और उपनिषदों में मूर्ति-पूजा का कहीं उल्लेख नहीं। वेदान्त दर्शन के अनुसार सभी जीवों में एक ही आत्मा है।
1815 में कलकत्ता आकर राममोहन रय ने कुछ पे्रमी-सज्जनों के सहयोग से ‘आत्मीय सभा’ नाम की एक संस्था गठित की। इस संस्था द्वारा उन्होंने पुस्तकें और पैम्फ्लेट लिखकर एक तरफ हिन्दू धर्म के कुसंस्कारों तथा मूर्ति-पूजा के विरूद्व और दूसरी तरफ मिशनरियों