द्वारा प्रचारित सारहीन मतवादों के विरूद्व प्रचार शुरू किया। उनका कहना था कि वास्तविकता हिन्दू-धर्म एकेश्वरवाद और विश्व-बंधुत्व पर आधारित है। उनके इस प्रचार का प्रभाव यह पड़ा कि कहां तो मिशनरी हिन्दुओं को ईसाई बनाने की सोच रहे थे और कहां विलियम आडम नाम के एक प्रसिद्व मिशनरी ने ईसाई मत के त्रित्ववाद को छोड़कर राममोहन राय के एकेश्वरवाद को अपना लिया। अब मिशनरी बड़ा बौखलाएं। उन्हें पता चला कि हिन्दू धर्म मूर्ति-पूजा और आचार-व्यवहार ही पर निर्भर नहीं है,
द्वारा प्रचारित सारहीन मतवादों के विरूद्व प्रचार शुरू किया। उनका कहना था कि वास्तविकता हिन्दू-धर्म एकेश्वरवाद और विश्व-बंधुत्व पर आधारित है। उनके इस प्रचार का प्रभाव यह पड़ा कि कहां तो मिशनरी हिन्दुओं को ईसाई बनाने की सोच रहे थे और कहां विलियम आडम नाम के एक प्रसिद्व मिशनरी ने ईसाई मत के त्रित्ववाद को छोड़कर राममोहन राय के एकेश्वरवाद को अपना लिया। अब मिशनरी बड़ा बौखलाएं। उन्हें पता चला कि हिन्दू धर्म मूर्ति-पूजा और आचार-व्यवहार ही पर निर्भर नहीं है,