यह निकला कि पूरे बंगाल में जाग्रति की तरंग दौड़ गई। जिन प्राचीन शास्त्रों को भुला दिया गया था, उनका फिर से अध्ययन शुरू हुआ। विरोधियों की संख्या चाहे बहुत अधिक थी, पर राजा राममोहन राय को उत्साही नवयुवकों और एडवर्ड हाइड तथा डेविड हेयर आदि उदार विचारों के अंगे्रज़ों का सहयोग प्राप्त हुआ। सती-प्रथा के विरूद्व वे बारह बरस से आन्दोलन करते आ रहे थे, आखिर उसे सफलता मिली।
4 दिसम्बर, 1882 को गर्वनर जनरल लार्ड विलियम ने कानून द्वारा
यह निकला कि पूरे बंगाल में जाग्रति की तरंग दौड़ गई। जिन प्राचीन शास्त्रों को भुला दिया गया था, उनका फिर से अध्ययन शुरू हुआ। विरोधियों की संख्या चाहे बहुत अधिक थी, पर राजा राममोहन राय को उत्साही नवयुवकों और एडवर्ड हाइड तथा डेविड हेयर आदि उदार विचारों के अंगे्रज़ों का सहयोग प्राप्त हुआ। सती-प्रथा के विरूद्व वे बारह बरस से आन्दोलन करते आ रहे थे, आखिर उसे सफलता मिली।
4 दिसम्बर, 1882 को गर्वनर जनरल लार्ड विलियम ने कानून द्वारा