सती-दाह बंद कर दिया। राममोहन राय के परामर्श से जनरल ने गंगा में संतान फेंकने की
182 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
भी मनाही कर दी।
राजा राममोहन राय ने जब अपना प्रचार-कार्य शुरू किया तब बंगाली समाज की जो हालत थी, उस बारे में सत्येन्द्रनाथ मजूमदार लिखते हैं:
‘‘अंगे्रज़ी राज्य के प्रारम्भ में धनी और बाबू बंगालियों का चरित्र कई तरह से भ्रष्ट हो चुका था। धन रहने पर वे पत्नी या पत्नियों के सामने ही कई उपपत्नियां रखते थे।
सती-दाह बंद कर दिया। राममोहन राय के परामर्श से जनरल ने गंगा में संतान फेंकने की
182 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
भी मनाही कर दी।
राजा राममोहन राय ने जब अपना प्रचार-कार्य शुरू किया तब बंगाली समाज की जो हालत थी, उस बारे में सत्येन्द्रनाथ मजूमदार लिखते हैं:
‘‘अंगे्रज़ी राज्य के प्रारम्भ में धनी और बाबू बंगालियों का चरित्र कई तरह से भ्रष्ट हो चुका था। धन रहने पर वे पत्नी या पत्नियों के सामने ही कई उपपत्नियां रखते थे।