योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

वे विद्या सुन्दर की कविताओं से तािा आशुकवियों के अश्लील एवं कुरूचिपूर्ण संगीतमय वागयुद्व के अभिनय से तृप्त होते थे। कलकत्ता के बाबू लोग बुलबुल की लड़ाई, पतंगों के पेच तथा चमकीली भड़कदार पोशाक पहन वेश्याओं के साथ बगीचों में मौज उड़ाने ही में मस्त रहते थे। और जब राममोहन राय का आन्दोलन आगे बढ़ा और नवजीवन की तरंग दौड़ी, तो बाबुओं के बैठकखाने में भट्टाचार्य की चैपालों में, गावों के चंडी-मंडपों में, जहां देखिए वहां राममोहन राय की


911 of 1197

वे विद्या सुन्दर की कविताओं से तािा आशुकवियों के अश्लील एवं कुरूचिपूर्ण संगीतमय वागयुद्व के अभिनय से तृप्त होते थे। कलकत्ता के बाबू लोग बुलबुल की लड़ाई, पतंगों के पेच तथा चमकीली भड़कदार पोशाक पहन वेश्याओं के साथ बगीचों में मौज उड़ाने ही में मस्त रहते थे। और जब राममोहन राय का आन्दोलन आगे बढ़ा और नवजीवन की तरंग दौड़ी, तो बाबुओं के बैठकखाने में भट्टाचार्य की चैपालों में, गावों के चंडी-मंडपों में, जहां देखिए वहां राममोहन राय की


911 of 1197