योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

और शेष समय समीप की गली में अपनी नानी के घर में रहकर अध्ययन करते हैं। अध्ययन के लिए ही वह यहां रहे हों ऐसी बात नहीं, नरेन्द्र एकान्त में रहना अधिक पसन्द करते हैं।’’

कमरा बहुत छोटा था। नरेन्द्र ने उसका नाम ‘तंग’ रख लिया था और मित्रों से कहा करते थे, ‘‘चलो, तंग में चलें।’’ अब इस ‘तंग’ की एक बैठक देखिएः

‘‘नरेन्द्र आज मन लगाकर पढ़ रहे थे। इसी समय किसी मित्र का आगमन हुआ। लगभग ग्यारह बजे होंगे। भोजन करके नरेन्द्र पढ़ रहे थे। मित्र ने आकर नरेन्द्र से कहा,


93 of 1197

और शेष समय समीप की गली में अपनी नानी के घर में रहकर अध्ययन करते हैं। अध्ययन के लिए ही वह यहां रहे हों ऐसी बात नहीं, नरेन्द्र एकान्त में रहना अधिक पसन्द करते हैं।’’

कमरा बहुत छोटा था। नरेन्द्र ने उसका नाम ‘तंग’ रख लिया था और मित्रों से कहा करते थे, ‘‘चलो, तंग में चलें।’’ अब इस ‘तंग’ की एक बैठक देखिएः

‘‘नरेन्द्र आज मन लगाकर पढ़ रहे थे। इसी समय किसी मित्र का आगमन हुआ। लगभग ग्यारह बजे होंगे। भोजन करके नरेन्द्र पढ़ रहे थे। मित्र ने आकर नरेन्द्र से कहा,


93 of 1197