योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

‘भाई, रात में पढ़ लेना, अभी ज़रा एक-दो गाने तो सुना दो।

26 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द

‘‘उसी समय नरेन्द्र ने पुस्तक बंद कर उसे एक ओर सरका दिया। तानपूरे के तारों को संभालकर, उन्हें स्वर में बांधकर गाना गाने से पहले उन्होंने अपने मित्र से कहा, ‘अच्छा तू तबला उठा।’

‘‘मित्र ने कहा, ‘भाई मैं तो बजाना जानता नहीं। स्कूल में मेज़ का तबला बजा लेता हूं, तो क्या तुम्हारे साथ तबला भी बजा सकूंगा?’

‘‘तब नरेन्द्र ने स्वयं थोड़ा-सा बजाकर दिखा दिया और कहा,


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‘भाई, रात में पढ़ लेना, अभी ज़रा एक-दो गाने तो सुना दो।

26 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द

‘‘उसी समय नरेन्द्र ने पुस्तक बंद कर उसे एक ओर सरका दिया। तानपूरे के तारों को संभालकर, उन्हें स्वर में बांधकर गाना गाने से पहले उन्होंने अपने मित्र से कहा, ‘अच्छा तू तबला उठा।’

‘‘मित्र ने कहा, ‘भाई मैं तो बजाना जानता नहीं। स्कूल में मेज़ का तबला बजा लेता हूं, तो क्या तुम्हारे साथ तबला भी बजा सकूंगा?’

‘‘तब नरेन्द्र ने स्वयं थोड़ा-सा बजाकर दिखा दिया और कहा,


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