पुरोहितों की शिक्षा के लिए धर्मशास्त्र विद्यालय की स्थापना की। वे स्वयं ही उक्त विद्यालय मंे शिक्षा के व्याख्यान देते थे, और सन् 1848 में उन्होंने धर्म विश्ववासियों की शिक्षा के लिए संस्कृत में ‘ब्रह्यधर्म’ नाम की पुस्तक लिखी, जो ‘धर्म व नीतिशास्त्र का आस्तित्व ग्रंथ है’ उनका अपना यह विश्वास था कि यह ग्रंथ भगवत्पे्ररणा से लिखा गया है।’’ (रामकृष्ण, पृष्ठ 119)
देवेन्द्रनाथ टैगोर का यह ब्रह्यधर्म राजा राममोहन राय के आदर्श
पुरोहितों की शिक्षा के लिए धर्मशास्त्र विद्यालय की स्थापना की। वे स्वयं ही उक्त विद्यालय मंे शिक्षा के व्याख्यान देते थे, और सन् 1848 में उन्होंने धर्म विश्ववासियों की शिक्षा के लिए संस्कृत में ‘ब्रह्यधर्म’ नाम की पुस्तक लिखी, जो ‘धर्म व नीतिशास्त्र का आस्तित्व ग्रंथ है’ उनका अपना यह विश्वास था कि यह ग्रंथ भगवत्पे्ररणा से लिखा गया है।’’ (रामकृष्ण, पृष्ठ 119)
देवेन्द्रनाथ टैगोर का यह ब्रह्यधर्म राजा राममोहन राय के आदर्श