में राममोहन राय के उत्साही सहयोगी थे। डेविड हेयर स्काट निवासी थे और व्यापार के लिए भारत आए थे। पर यहां आकर उन्होंने अपना सारा धन शिक्षा के प्रचार-प्रसार में लगा दिया और अपने आपको समाज-सुधार के लिए अर्पित कर दिया। डी रोजियो एंग्लो-इंडियन था। वह अठारह बरस की आयु में हिन्दू कालेज में अध्यापक नियुक्त हुआ था। वह प्रतिभाशाली लेखक तथा कवि था और फ्रांस के विश्वकोशियों से प्रभावित था। उसका किसी भी धर्म में विश्वास नहीं था। वह
में राममोहन राय के उत्साही सहयोगी थे। डेविड हेयर स्काट निवासी थे और व्यापार के लिए भारत आए थे। पर यहां आकर उन्होंने अपना सारा धन शिक्षा के प्रचार-प्रसार में लगा दिया और अपने आपको समाज-सुधार के लिए अर्पित कर दिया। डी रोजियो एंग्लो-इंडियन था। वह अठारह बरस की आयु में हिन्दू कालेज में अध्यापक नियुक्त हुआ था। वह प्रतिभाशाली लेखक तथा कवि था और फ्रांस के विश्वकोशियों से प्रभावित था। उसका किसी भी धर्म में विश्वास नहीं था। वह