एकदम भौतिकवादी था। उसके कवि और आकर्षक व्यक्तित्व के कारण कालेज के अधिकांश विद्यार्थी स्वच्छंद और विद्रोही बन गए। सिर्फ मूर्ति-पूजा और कुसंस्कारों ही की बात नहीं, वे हिन्दू धर्म और समाज ही से घृणा करने लगे।
पाश्चात्य प्रणाली तथा अन्य निरपेक्ष व्यक्ति स्वातंन्न्यवाद से प्रभावित ये नवयुवक ब्रह्यसमाज मे गए तो बुद्वि और धार्मिक अंतदृष्टि को मिलाने वाले अठारह महीने हिमालय के शिखर पर एकान्त में बिताने वाले मध्यमार्गी देवेन्द्रनाथ
एकदम भौतिकवादी था। उसके कवि और आकर्षक व्यक्तित्व के कारण कालेज के अधिकांश विद्यार्थी स्वच्छंद और विद्रोही बन गए। सिर्फ मूर्ति-पूजा और कुसंस्कारों ही की बात नहीं, वे हिन्दू धर्म और समाज ही से घृणा करने लगे।
पाश्चात्य प्रणाली तथा अन्य निरपेक्ष व्यक्ति स्वातंन्न्यवाद से प्रभावित ये नवयुवक ब्रह्यसमाज मे गए तो बुद्वि और धार्मिक अंतदृष्टि को मिलाने वाले अठारह महीने हिमालय के शिखर पर एकान्त में बिताने वाले मध्यमार्गी देवेन्द्रनाथ