योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

‘अच्छी तरह से देख ले। अवश्य बजा सकेगा। क्यों नहीं बजा सकेगा? कोई कठिन काम तो है नहीं। इस तरह बस ठेका दिए जा, हो गया।’ साथ ही साथ बजाने के बोल भी बतला दिए। मित्र एक-दो बार चेष्टा करने के बाद किसी तरह ठेका देने लगा। गाना आरम्भ हुआ। तानलय में उन्मुक्त होकर और दूसरों को उन्मुक्त बनाकर नरेन्द्र के हृदयस्पर्शी स्वर में टपपा, ढप, ख्याल, ध्रुुपद, बंगला, हिन्दी और संस्कृत गानों का प्रवाह चलने लगा।’’ (विवेकानन्द साहित्य, अष्टम खंड, पृष्ठ 259-60)


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‘अच्छी तरह से देख ले। अवश्य बजा सकेगा। क्यों नहीं बजा सकेगा? कोई कठिन काम तो है नहीं। इस तरह बस ठेका दिए जा, हो गया।’ साथ ही साथ बजाने के बोल भी बतला दिए। मित्र एक-दो बार चेष्टा करने के बाद किसी तरह ठेका देने लगा। गाना आरम्भ हुआ। तानलय में उन्मुक्त होकर और दूसरों को उन्मुक्त बनाकर नरेन्द्र के हृदयस्पर्शी स्वर में टपपा, ढप, ख्याल, ध्रुुपद, बंगला, हिन्दी और संस्कृत गानों का प्रवाह चलने लगा।’’ (विवेकानन्द साहित्य, अष्टम खंड, पृष्ठ 259-60)


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