और उनके अनुयायियों से नवयुवकों का टकराव स्वाभाविक था। इसी टकराव से अंतर्विरोध पैदा हुए और अंत में इसी से ब्रह्यसमाज विभाजित हुआ।
1866 में जो अखिल भारतीय ब्रह्यसमाज अलग हुआ। उसके नेता केशवचन्द्र की मां बचपन में मर गई थीं और उनका पालन-पोषण एक अंगे्रज़ी स्कूल में हुआ था। उन्होंने संस्कृत बिलकुल नहीं पढ़ी थी। ईसा उनके आराध्य और बाइबिल सर्वोत्तम धार्मिक ग्रंथ था। परिणाम यह क़ि उन्होंने अपने नये समाज को यहां तक ईसाइयत के रंग
और उनके अनुयायियों से नवयुवकों का टकराव स्वाभाविक था। इसी टकराव से अंतर्विरोध पैदा हुए और अंत में इसी से ब्रह्यसमाज विभाजित हुआ।
1866 में जो अखिल भारतीय ब्रह्यसमाज अलग हुआ। उसके नेता केशवचन्द्र की मां बचपन में मर गई थीं और उनका पालन-पोषण एक अंगे्रज़ी स्कूल में हुआ था। उन्होंने संस्कृत बिलकुल नहीं पढ़ी थी। ईसा उनके आराध्य और बाइबिल सर्वोत्तम धार्मिक ग्रंथ था। परिणाम यह क़ि उन्होंने अपने नये समाज को यहां तक ईसाइयत के रंग