के मनुष्यों के लिए खोल दिया और अपने उपासना ग्रंथ में बाइबिल, कुरान और
188 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
जेन्दावस्त के अंश शामिल किए। लेकिन केशव और उनके अनुयायियों का झुकाव विशेष रूप से ईसाई धर्म ही की ओर था, इसलिए ब्रह्यसमाज की धार्मिक साधना में पाप बोध, पाप भय, पश्चात्ताप और भावावेश में रोना इत्यादि को आध्यात्मिक उन्नति का सहायक माना जाने लगा।
ब्रह्यसमाज का कार्यक्षेत्र समाज-सुधार था। केशवचन्द्र और उनके अनयायियों ने रात्रि-स्कूल खोले,
के मनुष्यों के लिए खोल दिया और अपने उपासना ग्रंथ में बाइबिल, कुरान और
188 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
जेन्दावस्त के अंश शामिल किए। लेकिन केशव और उनके अनुयायियों का झुकाव विशेष रूप से ईसाई धर्म ही की ओर था, इसलिए ब्रह्यसमाज की धार्मिक साधना में पाप बोध, पाप भय, पश्चात्ताप और भावावेश में रोना इत्यादि को आध्यात्मिक उन्नति का सहायक माना जाने लगा।
ब्रह्यसमाज का कार्यक्षेत्र समाज-सुधार था। केशवचन्द्र और उनके अनयायियों ने रात्रि-स्कूल खोले,