योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

स्त्री-शिक्षा और स्त्री-स्वाधीनता पर बल दिया, खान-पान में पुराने विधि-निषेधों का उल्लंघन किया और असवर्ण-विवाह की प्रथा डाली, जिसे ब्रिटिश सरकार ने 1872 में कानून द्वारा मान्यता प्रदान की। लेकिन ब्रह्यसमाज के प्रचारकों की ईसाई धर्म के प्रति प्रीति और ईसाई नीतिवाद के प्रति आकर्षण यहां तक बढ़ गया था कि वे अपने भाषणों में हिन्दू समाज, उसके रीति-रिवाजों और प्राचीन शास्त्रों पर भीषण आक्रमण करने लगे। उनमें उदारता तथा सहिष्णुता


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स्त्री-शिक्षा और स्त्री-स्वाधीनता पर बल दिया, खान-पान में पुराने विधि-निषेधों का उल्लंघन किया और असवर्ण-विवाह की प्रथा डाली, जिसे ब्रिटिश सरकार ने 1872 में कानून द्वारा मान्यता प्रदान की। लेकिन ब्रह्यसमाज के प्रचारकों की ईसाई धर्म के प्रति प्रीति और ईसाई नीतिवाद के प्रति आकर्षण यहां तक बढ़ गया था कि वे अपने भाषणों में हिन्दू समाज, उसके रीति-रिवाजों और प्राचीन शास्त्रों पर भीषण आक्रमण करने लगे। उनमें उदारता तथा सहिष्णुता


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