और गरीबदास सम्प्रदाय के स्वामी कृष्णानंद उनके प्रवक्ता थे। उन्होंने यज्ञोपवीत-शिखा और दान-दक्षिणा की आध्यात्मिक व्याख्या की। ब्रह्यसमाज पाश्चात्य प्रणाली से प्रभावित मध्यवर्ग का आन्दोलन ािा और हरिसभा उच्च वर्ग के भरे पेट लोगों की संस्था थी, जिनमें जीवन और उत्साह नहीं था । इस वर्ग की निकृष्टता का उसके प्रचार में व्यक्त होना स्वाभाविक था। ‘‘बारह वर्ष के बच्चे भी ‘हरिसभा’ की वेदी से हरिभक्ति की महिमा के संबंध में भाषण देते
और गरीबदास सम्प्रदाय के स्वामी कृष्णानंद उनके प्रवक्ता थे। उन्होंने यज्ञोपवीत-शिखा और दान-दक्षिणा की आध्यात्मिक व्याख्या की। ब्रह्यसमाज पाश्चात्य प्रणाली से प्रभावित मध्यवर्ग का आन्दोलन ािा और हरिसभा उच्च वर्ग के भरे पेट लोगों की संस्था थी, जिनमें जीवन और उत्साह नहीं था । इस वर्ग की निकृष्टता का उसके प्रचार में व्यक्त होना स्वाभाविक था। ‘‘बारह वर्ष के बच्चे भी ‘हरिसभा’ की वेदी से हरिभक्ति की महिमा के संबंध में भाषण देते