में इंग्लैंड की यात्रा पर गए। वहां उन्होंने अपनी सरल अंगे्रज़ी में 40,000 व्यक्तियों के सम्मुख भाषण दिए थे। पश्चिम के आध्यात्मिक सहयोगी और पूर्व में ईसा के संदेशवाहक के रूप में उनका स्वागत हुआ। वहां से लौटे तो वे अपनी ख्याति की पराकाष्ठा पर थे। सरकार की सद्भावना से उनकी ब्रह्यसमाज को विशेष लाभ हुआ था। इलाहाबाद, मुंगेर, लखनऊ, बम्बई, शिमला और लाहौर इत्यादि शहरों में उनकी शाखाएं खुल गई। केशव ने 1873 में इस नवीन धर्म के भाई-बहनों
में इंग्लैंड की यात्रा पर गए। वहां उन्होंने अपनी सरल अंगे्रज़ी में 40,000 व्यक्तियों के सम्मुख भाषण दिए थे। पश्चिम के आध्यात्मिक सहयोगी और पूर्व में ईसा के संदेशवाहक के रूप में उनका स्वागत हुआ। वहां से लौटे तो वे अपनी ख्याति की पराकाष्ठा पर थे। सरकार की सद्भावना से उनकी ब्रह्यसमाज को विशेष लाभ हुआ था। इलाहाबाद, मुंगेर, लखनऊ, बम्बई, शिमला और लाहौर इत्यादि शहरों में उनकी शाखाएं खुल गई। केशव ने 1873 में इस नवीन धर्म के भाई-बहनों