योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

में एकता स्थापित करने के लिए सारे भारत की यात्रा की। इसी यात्रा के दौरान उनके मन में ब्रह्यसमाज को अधिक लोकप्रिय बनाने का विचार आया। अतएव ‘‘महाभक्त चैतन्य के रहस्यवाद और संकीर्तन को ब्रह्यसमाज धर्म मंदिर के अन्दर प्रेवश कराया गया। प्रातःकाल से लेकर रात्रि समय तक वैष्णव संगीत वाद्यों के साथ प्रार्थनाएं व स्तोत्रों का पाठ, और भगवान का महोत्सव होने लगा। और वे केशव जिनके बारे में यह कहा जाता था कि वे कभी न रोए थे, अश्रुप्लावित


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में एकता स्थापित करने के लिए सारे भारत की यात्रा की। इसी यात्रा के दौरान उनके मन में ब्रह्यसमाज को अधिक लोकप्रिय बनाने का विचार आया। अतएव ‘‘महाभक्त चैतन्य के रहस्यवाद और संकीर्तन को ब्रह्यसमाज धर्म मंदिर के अन्दर प्रेवश कराया गया। प्रातःकाल से लेकर रात्रि समय तक वैष्णव संगीत वाद्यों के साथ प्रार्थनाएं व स्तोत्रों का पाठ, और भगवान का महोत्सव होने लगा। और वे केशव जिनके बारे में यह कहा जाता था कि वे कभी न रोए थे, अश्रुप्लावित


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