मुख के साथ उन सब आयोजनों में पुरोहित का कार्य करते थे।’’ (वही, पृष्ठ 129)
इससे अखिल भारतीय ब्रह्यसमाज में भी अन्तर्विरोध पैदा हुए और जब केशवचन्द्र ने अपनी नाबलिग कन्या का ब्याह कूचबिहार के राजा से किया तो उनपर
190 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
आदर्शों को त्याग देने का आरोप लगाकर सदस्यों की एक बड़ी संख्या ने अलग होकर ‘साधारण ब्रह्यसमाज’ की स्थापना की।
साधारण ब्रह्यसमाज के नेता नगेन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय थे। हरिसभा के
मुख के साथ उन सब आयोजनों में पुरोहित का कार्य करते थे।’’ (वही, पृष्ठ 129)
इससे अखिल भारतीय ब्रह्यसमाज में भी अन्तर्विरोध पैदा हुए और जब केशवचन्द्र ने अपनी नाबलिग कन्या का ब्याह कूचबिहार के राजा से किया तो उनपर
190 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
आदर्शों को त्याग देने का आरोप लगाकर सदस्यों की एक बड़ी संख्या ने अलग होकर ‘साधारण ब्रह्यसमाज’ की स्थापना की।
साधारण ब्रह्यसमाज के नेता नगेन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय थे। हरिसभा के