पंडित ससाधर ने उनसे विवाद किया और कहा कि मूर्तरूप के बिना भगवान की पूजा सम्भव नहीं है। अपनी धारणा को कोई न कोई आकार तो देना ही होगा। यह विवाद पुराना है। सगुण और निर्गुण की-साकार और निराकार की बहस हिन्दुओं के विभिन्न सम्प्रदायों में भी होती आई और ईसाइयों और हिन्दुओं में बड़े दिनों तक चलती रही। बौद्वमत सब धर्मों से अधिक दार्शनिक और तर्कसंगत है। बुद्व ने आत्मा और परमात्मा के अस्तित्व को भी स्वीकार नहीं किया। लेकिन कालान्तर में यह बौद्व धर्म महायान,
पंडित ससाधर ने उनसे विवाद किया और कहा कि मूर्तरूप के बिना भगवान की पूजा सम्भव नहीं है। अपनी धारणा को कोई न कोई आकार तो देना ही होगा। यह विवाद पुराना है। सगुण और निर्गुण की-साकार और निराकार की बहस हिन्दुओं के विभिन्न सम्प्रदायों में भी होती आई और ईसाइयों और हिन्दुओं में बड़े दिनों तक चलती रही। बौद्वमत सब धर्मों से अधिक दार्शनिक और तर्कसंगत है। बुद्व ने आत्मा और परमात्मा के अस्तित्व को भी स्वीकार नहीं किया। लेकिन कालान्तर में यह बौद्व धर्म महायान,