हुई। कहते हैं कि नागार्जुन ने भूटान में जिस एकजात देवी की आराधना का सूत्रपात किया, उसी का नाम काली है।
कहने का तात्पर्य यह है कि धर्म चाहे वह प्रारम्भ में ईश्वर को न माने यदि पुनर्जन्म को मानता है, तो अन्ततोगत्वा उसे अपने अनुयायियों को एक ईश्वर-एक अराध्य देना पड़ेगा। धर्म के प्रवर्तक या विचारक उसे निर्गुण और निराकार कहते रहें, लेकिन साधारण अपढ़ अनुयायी उसे अवश्य सगुण और साकार बना लेंगे। चूंकि तथ्यों की मिथ्या व्याख्या का नाम ही धर्म है,
हुई। कहते हैं कि नागार्जुन ने भूटान में जिस एकजात देवी की आराधना का सूत्रपात किया, उसी का नाम काली है।
कहने का तात्पर्य यह है कि धर्म चाहे वह प्रारम्भ में ईश्वर को न माने यदि पुनर्जन्म को मानता है, तो अन्ततोगत्वा उसे अपने अनुयायियों को एक ईश्वर-एक अराध्य देना पड़ेगा। धर्म के प्रवर्तक या विचारक उसे निर्गुण और निराकार कहते रहें, लेकिन साधारण अपढ़ अनुयायी उसे अवश्य सगुण और साकार बना लेंगे। चूंकि तथ्यों की मिथ्या व्याख्या का नाम ही धर्म है,