ब्रह्यसमाज और आर्य समाज ने मूर्ति-पूजा के कलंक को धो देने का बहुत प्रयास किया, लेकिन हम देखते हैं-कि खुद मुसलमान, ईसाई ब्रह्यसमाजी और आर्यसमाजी मूर्ति-पूजा से भी निकृष्टतम धर्मान्धता का परिचय दे रहे हैं। जहां तक मूर्ति-पूजा का संबंध है, वह भी ज्यांे की त्यों बनी हुई हैं। न सिर्फ अपढ़ जनसाधारण बल्कि एम. एस. सी पास और इंजिनियर तक हनुमान के मन्दिर और वैष्णव देवी जाते हैं, काली की पूजा करते हैं।
191 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
ब्रह्यसमाज और आर्य समाज ने मूर्ति-पूजा के कलंक को धो देने का बहुत प्रयास किया, लेकिन हम देखते हैं-कि खुद मुसलमान, ईसाई ब्रह्यसमाजी और आर्यसमाजी मूर्ति-पूजा से भी निकृष्टतम धर्मान्धता का परिचय दे रहे हैं। जहां तक मूर्ति-पूजा का संबंध है, वह भी ज्यांे की त्यों बनी हुई हैं। न सिर्फ अपढ़ जनसाधारण बल्कि एम. एस. सी पास और इंजिनियर तक हनुमान के मन्दिर और वैष्णव देवी जाते हैं, काली की पूजा करते हैं।
191 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द