पाएंगे कि विवेकानन्द एक व्यक्ति निरपेक्ष राष्ट्र नेता थे। मूर्ति-पूजा का विरोध करके उन्हें अपने आपको प्रगतिशील और महान विचारक सिद्व नहीं करना था, बल्कि उन्हें मूर्ति-पूजा का पक्ष लेकर भारत की अपढ़ दरिद्र साधारण जनता की साम्राज्यवाद के सांस्कृतिक आक्रमण से रक्षा करनी थी और वह उन्होंने की । 30 अक्टूबर, 1899 को वे अपनी प्रिय अमेरिकन बहन कुमारी हेल के नाम अपने पत्र में लिखते हैं:
‘‘जहां तक धार्मिक सम्प्रदायों का प्रश्न है ब्रह्यसमाज,
पाएंगे कि विवेकानन्द एक व्यक्ति निरपेक्ष राष्ट्र नेता थे। मूर्ति-पूजा का विरोध करके उन्हें अपने आपको प्रगतिशील और महान विचारक सिद्व नहीं करना था, बल्कि उन्हें मूर्ति-पूजा का पक्ष लेकर भारत की अपढ़ दरिद्र साधारण जनता की साम्राज्यवाद के सांस्कृतिक आक्रमण से रक्षा करनी थी और वह उन्होंने की । 30 अक्टूबर, 1899 को वे अपनी प्रिय अमेरिकन बहन कुमारी हेल के नाम अपने पत्र में लिखते हैं:
‘‘जहां तक धार्मिक सम्प्रदायों का प्रश्न है ब्रह्यसमाज,