आर्यसमाज तथा अन्य व्यर्थ की खिचड़ी पकाते हैं। वे मात्र अंगे्रज़ी मालिकों के प्रति कृतज्ञता की ध्वनियां हैं, जिससे वे हमें सांस लेने की आज्ञा दे सकें। हम लोगों ने एक नये भारत का श्रीगणेश किया है-एक विकास-इस बात की प्रतीक्षा में कि आगे क्या घटित होता है। हम तभी नये विचारों में आस्था रखते हैं, जब राष्ट्र उनकी मांग करता है, जिसका हमारे मालिक अनुमोदन करें, किन्तु हमारे लिए वह सत्य है, जो भारतीय बुद्वि और अनुभूति द्वारा मंडित
आर्यसमाज तथा अन्य व्यर्थ की खिचड़ी पकाते हैं। वे मात्र अंगे्रज़ी मालिकों के प्रति कृतज्ञता की ध्वनियां हैं, जिससे वे हमें सांस लेने की आज्ञा दे सकें। हम लोगों ने एक नये भारत का श्रीगणेश किया है-एक विकास-इस बात की प्रतीक्षा में कि आगे क्या घटित होता है। हम तभी नये विचारों में आस्था रखते हैं, जब राष्ट्र उनकी मांग करता है, जिसका हमारे मालिक अनुमोदन करें, किन्तु हमारे लिए वह सत्य है, जो भारतीय बुद्वि और अनुभूति द्वारा मंडित