संस्कृति और परम्परा पर इसी प्रकार आक्रमण किया था। मध्ययुग का भक्ति आन्दोलन इसी आक्रमण की प्रतिक्रिया थी। कबीर, दादू, नानक, चैतन्य और तुकाराम ने इस आक्रमण से जनसाधारण की रक्षा की और उन्हें अपने व्यक्तिगत उपास्य एि। राम अवतार बना देने वाले तुलसी को भी चट प्रतिक्रियावादी कह दिया जाता है और इस बात का तनिक भी ध्यान नहीं रखा जाता कि तुलसी ने इस विदेशी सांस्कृतिक आक्रमण के विरूद्व शैव से शूद्र तक का संयुक्त मोर्चा स्थापित करने
संस्कृति और परम्परा पर इसी प्रकार आक्रमण किया था। मध्ययुग का भक्ति आन्दोलन इसी आक्रमण की प्रतिक्रिया थी। कबीर, दादू, नानक, चैतन्य और तुकाराम ने इस आक्रमण से जनसाधारण की रक्षा की और उन्हें अपने व्यक्तिगत उपास्य एि। राम अवतार बना देने वाले तुलसी को भी चट प्रतिक्रियावादी कह दिया जाता है और इस बात का तनिक भी ध्यान नहीं रखा जाता कि तुलसी ने इस विदेशी सांस्कृतिक आक्रमण के विरूद्व शैव से शूद्र तक का संयुक्त मोर्चा स्थापित करने