जो भक्ति आन्दोलन संस्कृति की रक्षा के लिए शुरू हुआ था, उसने आखिर पंजाब और महाराष्ट्र में सशस्त्र संघर्ष का रूप धारण किया और उसके परिणामस्वरूप सिख और मराठा सरकारें अस्तित्व में आई। लेकिन, विवेकानन्द के शब्दों में, ‘मराठा या सिख साम्राज्य के पूर्व प्रवर्तित धार्मिक महत्त्वकांक्षा पूर्णतया प्रतिक्रियावादी थी। पूना या लाहौर के दाबार में उस बौद्विक गरिमा की एक किरण भी नहीं मिलती थी, जिससे मुगलदरबार घिरा रहता था, मालवा या
जो भक्ति आन्दोलन संस्कृति की रक्षा के लिए शुरू हुआ था, उसने आखिर पंजाब और महाराष्ट्र में सशस्त्र संघर्ष का रूप धारण किया और उसके परिणामस्वरूप सिख और मराठा सरकारें अस्तित्व में आई। लेकिन, विवेकानन्द के शब्दों में, ‘मराठा या सिख साम्राज्य के पूर्व प्रवर्तित धार्मिक महत्त्वकांक्षा पूर्णतया प्रतिक्रियावादी थी। पूना या लाहौर के दाबार में उस बौद्विक गरिमा की एक किरण भी नहीं मिलती थी, जिससे मुगलदरबार घिरा रहता था, मालवा या