संगीत शास्त्र एवं धनुष विद्या के आविष्कार में, यहां तक कि आधुनिक यूरोपीय सभ्यता के निर्माण में किसी भी अन्य प्राचीन अथवा अर्वाचीन जाति से कहीं अधिक योगदान किया है।
फिर उसने अपनी दूसरी विशेषता से अपना धर्म, अपना दर्शन, अपना इतिहास, अपना नीति-शास्त्र, अपना राज्य-शास्त्र सब काव्यमयी कल्पना के पुण्य-कुंज से सजा दिए हैं-और यह सब चमत्कार है उस भाषा का, जिसे हम ‘संस्कृत’ कहते हैं, जिसके अतिरिक्त किसी अन्य भाषा में उन्हें इससे अधिक अच्छी प्रकार व्यक्त करना सम्भव न था,
संगीत शास्त्र एवं धनुष विद्या के आविष्कार में, यहां तक कि आधुनिक यूरोपीय सभ्यता के निर्माण में किसी भी अन्य प्राचीन अथवा अर्वाचीन जाति से कहीं अधिक योगदान किया है।
फिर उसने अपनी दूसरी विशेषता से अपना धर्म, अपना दर्शन, अपना इतिहास, अपना नीति-शास्त्र, अपना राज्य-शास्त्र सब काव्यमयी कल्पना के पुण्य-कुंज से सजा दिए हैं-और यह सब चमत्कार है उस भाषा का, जिसे हम ‘संस्कृत’ कहते हैं, जिसके अतिरिक्त किसी अन्य भाषा में उन्हें इससे अधिक अच्छी प्रकार व्यक्त करना सम्भव न था,