योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

न है। यहां तक कि गणित शास्त्र के कठोर तथ्यों की अभिव्यक्ति के लिए भी उस भाषा ने हमें संगीतमय अंक प्रदान किए।

इन्हीं दो विशेषताओं के बल पर हमारी यह जाति आज भी जीवित है। ‘‘यदि हमारी रीति-नीति इतनी खराब होती, तो इतने दिनों में हम लोग नष्ट क्यों नहीं हो गए? विदेशी विजेताओं की चेष्टा में क्या कसर रही है? तब भी सारे हिन्दू मरकर नष्ट क्यों नहीं हो गए।? अन्याय असभ्य देशों में भी तो ऐसा ही हुआ है। भारतीय प्रदेश ऐसे मानव जनविहीन


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न है। यहां तक कि गणित शास्त्र के कठोर तथ्यों की अभिव्यक्ति के लिए भी उस भाषा ने हमें संगीतमय अंक प्रदान किए।

इन्हीं दो विशेषताओं के बल पर हमारी यह जाति आज भी जीवित है। ‘‘यदि हमारी रीति-नीति इतनी खराब होती, तो इतने दिनों में हम लोग नष्ट क्यों नहीं हो गए? विदेशी विजेताओं की चेष्टा में क्या कसर रही है? तब भी सारे हिन्दू मरकर नष्ट क्यों नहीं हो गए।? अन्याय असभ्य देशों में भी तो ऐसा ही हुआ है। भारतीय प्रदेश ऐसे मानव जनविहीन


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