योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

क्यों नहीं हो गए कि विदेशी उसी तरह यहां आकर खेती-बाड़ी करने लगते जैसा कि आस्ट्रेलिया, अमेरिका तथा अफ्रिका आदि में हुए तथा हो रहा है? तब वे विदेशी, तुम अपने को जितना बलवान समझते हो, वह केवल कल्पना ही है, भारत में भी ब्रह्य है, सार है, इसे पहले समझ लो कि अब भी हमारे पास जगत् के सभ्यता-भंडार मंे जोड़ने के लिए कुछ है, इसीलिए हम बचे हैं।’’

और अंगे्रज़ का अंधानुकरण करने वालों से कहा:

‘‘...इसे तुम लोग भी अच्छी तरह समझ लो जो


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क्यों नहीं हो गए कि विदेशी उसी तरह यहां आकर खेती-बाड़ी करने लगते जैसा कि आस्ट्रेलिया, अमेरिका तथा अफ्रिका आदि में हुए तथा हो रहा है? तब वे विदेशी, तुम अपने को जितना बलवान समझते हो, वह केवल कल्पना ही है, भारत में भी ब्रह्य है, सार है, इसे पहले समझ लो कि अब भी हमारे पास जगत् के सभ्यता-भंडार मंे जोड़ने के लिए कुछ है, इसीलिए हम बचे हैं।’’

और अंगे्रज़ का अंधानुकरण करने वालों से कहा:

‘‘...इसे तुम लोग भी अच्छी तरह समझ लो जो


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