उसके उत्तर में कैलास है, वहां बूढे़ शिव का प्रधान अड्डा है। उस कैलास को दस सिर और बीस हाथ वाला रावण
195 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
भी नहीं हिला पाया, फिर उसे हिलाना क्या किसी पादरी-सादरी का काम है? वे बूढे़ शिव डमरू बजाएंगे, यहां काली बलि खाएगी और श्रीकृष्ण बंसरी बजाएंगे-यही सब देश में हमेशा होगा ! यदि तुम्हें अच्छा नहीं लगता तो हट जाओ। तुम दो-चार लोगों के लिए क्या सारे देश को अपना सर्वनाश करना होगा? इतनी बड़ी दुनिया पड़ी है,
उसके उत्तर में कैलास है, वहां बूढे़ शिव का प्रधान अड्डा है। उस कैलास को दस सिर और बीस हाथ वाला रावण
195 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
भी नहीं हिला पाया, फिर उसे हिलाना क्या किसी पादरी-सादरी का काम है? वे बूढे़ शिव डमरू बजाएंगे, यहां काली बलि खाएगी और श्रीकृष्ण बंसरी बजाएंगे-यही सब देश में हमेशा होगा ! यदि तुम्हें अच्छा नहीं लगता तो हट जाओ। तुम दो-चार लोगों के लिए क्या सारे देश को अपना सर्वनाश करना होगा? इतनी बड़ी दुनिया पड़ी है,