किसी दूसरी जगह जाकर क्यों नहीं चरते ? ऐसा तो कर ही न सकोगे, साहस कहां है ? इस बूढ़े शिव का अन्न खाएंगे, नमकहरामी करेंगे और ईसा की जय मनाएंगे। धिक्कार है ऐसे लोगों को, जो यूरोपियनों के सामने जाकर गिड़गिड़ाते हैं कि हम अति नीच हैं, हम क्षुद्र हैं, हमारा सब कुछ खराब है। पर हां, यह बात तुम्हारे लिए ठीक हो सकती है, तुम लोग अवश्य सत्यवादी हो, पर तुम अपने भीतर सारे देश को क्यों जोड़ लेते हो ? ऐ भगवान् यह किस देश की सभ्यता है ? (दशम खंड, पृष्ठ 49-50)
किसी दूसरी जगह जाकर क्यों नहीं चरते ? ऐसा तो कर ही न सकोगे, साहस कहां है ? इस बूढ़े शिव का अन्न खाएंगे, नमकहरामी करेंगे और ईसा की जय मनाएंगे। धिक्कार है ऐसे लोगों को, जो यूरोपियनों के सामने जाकर गिड़गिड़ाते हैं कि हम अति नीच हैं, हम क्षुद्र हैं, हमारा सब कुछ खराब है। पर हां, यह बात तुम्हारे लिए ठीक हो सकती है, तुम लोग अवश्य सत्यवादी हो, पर तुम अपने भीतर सारे देश को क्यों जोड़ लेते हो ? ऐ भगवान् यह किस देश की सभ्यता है ? (दशम खंड, पृष्ठ 49-50)