मार्च 1901 में ढाका में दिए गए अपने भाषण में विवेकानन्द ने इन दलाल तत्त्वों की श्रेणी से अपने को अलग करते हुए कहा था:
‘‘उक्त विचार वालों के विपरीत एक और वर्ग है, यह प्राचीन वर्ग कहता है कि हम लोग तुम्हारी बाल की खाल निकालने वाला तर्कवाद नहीं जानते और न हमें जानने की इच्छा ही है, हम लोग तो ईश्वर और आत्मा का साक्षात्कार करना चाहते हैं। हम सुख-दुःख में इस संसार को छोड़कर इसके अतीत प्रदेश में, जहां परम आनन्द है, जाना चाहते
मार्च 1901 में ढाका में दिए गए अपने भाषण में विवेकानन्द ने इन दलाल तत्त्वों की श्रेणी से अपने को अलग करते हुए कहा था:
‘‘उक्त विचार वालों के विपरीत एक और वर्ग है, यह प्राचीन वर्ग कहता है कि हम लोग तुम्हारी बाल की खाल निकालने वाला तर्कवाद नहीं जानते और न हमें जानने की इच्छा ही है, हम लोग तो ईश्वर और आत्मा का साक्षात्कार करना चाहते हैं। हम सुख-दुःख में इस संसार को छोड़कर इसके अतीत प्रदेश में, जहां परम आनन्द है, जाना चाहते