योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

हैं। यह वर्ग कहता है कि ‘सविश्वास गंगा-स्नान करने से मुक्ति होती है। शिव, राम, विष्णु आदि किसी एक में ईश्वर-बुद्वि रखकर श्रद्वा-भक्ति पूर्वक उपासना करने से मुक्ति होती है। मुझे गर्व है कि मैं इन दृढ़ आस्था वालों के प्राचीन वर्ग का हूं।’’ (पंचम खंड, पृष्ठ 340)

इससे पहले अपने रामनाड के भाषण में इस कथन की व्याख्या यों की थी:

‘‘मुझे बड़े दुःख से कहना पड़ता है कि आजकल हम पाश्चात्य भावनाओं से अणुप्राणित जितने लोगों के उदाहरण पाते हैं,


985 of 1197

हैं। यह वर्ग कहता है कि ‘सविश्वास गंगा-स्नान करने से मुक्ति होती है। शिव, राम, विष्णु आदि किसी एक में ईश्वर-बुद्वि रखकर श्रद्वा-भक्ति पूर्वक उपासना करने से मुक्ति होती है। मुझे गर्व है कि मैं इन दृढ़ आस्था वालों के प्राचीन वर्ग का हूं।’’ (पंचम खंड, पृष्ठ 340)

इससे पहले अपने रामनाड के भाषण में इस कथन की व्याख्या यों की थी:

‘‘मुझे बड़े दुःख से कहना पड़ता है कि आजकल हम पाश्चात्य भावनाओं से अणुप्राणित जितने लोगों के उदाहरण पाते हैं,


985 of 1197