वे अधिकार असफलता के हैं, इस समय भारत में हमारे मार्ग में दो बड़ी रूकावटें हैं-एक ओर हमारा प्राचीन हिन्दू समाज और दूसरी ओर अर्वाचीन यूरोपीय सभ्यता। इन दोनों में यदि कोई मुझसे एक को पसन्द करने के लिए कहता है तो मैं प्राचीन हिन्दू समाज ही को पसन्द करूंगा, क्योंकि अक्षय होने पर भी, अपक्व होने पर भी, कट्टर हिन्दुओं के हृदय में एक विश्वास है, एक बल है-जिससे वह अपने पैरों पर खड़ा हो सकता है। किन्तु विलायती रंग में रंगा व्यक्ति सर्वथा मेरूदंडविहीन होता है,
वे अधिकार असफलता के हैं, इस समय भारत में हमारे मार्ग में दो बड़ी रूकावटें हैं-एक ओर हमारा प्राचीन हिन्दू समाज और दूसरी ओर अर्वाचीन यूरोपीय सभ्यता। इन दोनों में यदि कोई मुझसे एक को पसन्द करने के लिए कहता है तो मैं प्राचीन हिन्दू समाज ही को पसन्द करूंगा, क्योंकि अक्षय होने पर भी, अपक्व होने पर भी, कट्टर हिन्दुओं के हृदय में एक विश्वास है, एक बल है-जिससे वह अपने पैरों पर खड़ा हो सकता है। किन्तु विलायती रंग में रंगा व्यक्ति सर्वथा मेरूदंडविहीन होता है,