मुख्य कारण यह है कि इसके लिए उन्हें साहबो से वाहवाही मिलती है। हमारी कितनी ही प्रथाएं इसलिए दोषपूर्ण हैं कि साहब लोग उन्हें दोषपूर्ण कहते हैं। मुझे ऐसे विचार पसन्द नहीं हैं। अपने बल पर खड़े रहिए-चाहे जीवित रहिए या मरिए। यदि जगत् में कोई पाप है, तो वह है दुर्बलता, दुर्बलता ही मृत्यु है, दुर्बलता ही पाप है। इसलिए सब प्रकार से दुर्बलता का त्याग कीजिए। यह असंतुलित प्राणी अभी तक निश्चित व्यक्तित्व नहीं ग्रहण कर सके हैं, और हम उनको क्या कहें-स्त्री,
मुख्य कारण यह है कि इसके लिए उन्हें साहबो से वाहवाही मिलती है। हमारी कितनी ही प्रथाएं इसलिए दोषपूर्ण हैं कि साहब लोग उन्हें दोषपूर्ण कहते हैं। मुझे ऐसे विचार पसन्द नहीं हैं। अपने बल पर खड़े रहिए-चाहे जीवित रहिए या मरिए। यदि जगत् में कोई पाप है, तो वह है दुर्बलता, दुर्बलता ही मृत्यु है, दुर्बलता ही पाप है। इसलिए सब प्रकार से दुर्बलता का त्याग कीजिए। यह असंतुलित प्राणी अभी तक निश्चित व्यक्तित्व नहीं ग्रहण कर सके हैं, और हम उनको क्या कहें-स्त्री,