पुरूष तथा पशु ! प्राचीन पथावलम्बी सभी लोग कट्टर होने पर भी मनुष्य थे। उन सभी लोगों में एक दृढ़ता थी। अब भी इन लोगों में कुछ आदर्श पुरूषों के उदाहरण हैं।’’ (वही, पृष्ठ 47)
रामकृष्ण परमहंस, सामन्ती दबाव के बावजुद झूठी गवाही न देने वाले उनके पिता पंडित क्षुदीराम और पवहारी बाबा ऐसे ही आदर्श पुरूषों के उदाहरण थे। जबकि देवेन्द्रनाथ ठाकुर, केशवचन्द्र और जस्टिस रामनाड इत्यादि में आधुनिक होते हुए भी इस दृढ़ता का अभाव था। दरअसल
पुरूष तथा पशु ! प्राचीन पथावलम्बी सभी लोग कट्टर होने पर भी मनुष्य थे। उन सभी लोगों में एक दृढ़ता थी। अब भी इन लोगों में कुछ आदर्श पुरूषों के उदाहरण हैं।’’ (वही, पृष्ठ 47)
रामकृष्ण परमहंस, सामन्ती दबाव के बावजुद झूठी गवाही न देने वाले उनके पिता पंडित क्षुदीराम और पवहारी बाबा ऐसे ही आदर्श पुरूषों के उदाहरण थे। जबकि देवेन्द्रनाथ ठाकुर, केशवचन्द्र और जस्टिस रामनाड इत्यादि में आधुनिक होते हुए भी इस दृढ़ता का अभाव था। दरअसल